जैसा कि हम सब जानते हैं कि पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से जूझ रही है, उस पर इसके नए-नए वेरिएंट आकर और नई समस्या खड़ी करते रहते हैं। पहले अल्फा फिर गामा उसके बाद अब ओमिक्रोन से दुनिया परेशान चल रही है।
इसके बीच में ही चीन के वुहान से शोधकर्ताओं ने एक नई खबर दी है कि कोरोना का नया वेरिएंट नियोकोव भी आने वाला है। यह इंसानों में इंफेक्शन फैलाने की अपनी स्टेज से बस एक कदम दूरी पर है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस वायरस के 10 में से 3 संक्रमितों की मौत हो जाती है।
यह वायरस चमगादड़ से फैला है और आज हम इस लेख में विस्तार से आपको बताएंगे कि नियोकोव वायरस कहाँ से मिला? क्या इंसानों में भी फैल सकता है नियोकोव वायरस? क्या नियोकोव वायरस कुछ वर्ष पूर्व आई सांस की बीमारी मर्स से संबंधित है? क्या वैक्सीन को चकमा दे सकता है ये नया वैरिएंट?
कहाँ मिला है यह नया कोरोना वायरस- नियोकोव?
रूसी न्यूज एजेंसी स्पूतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना का ये नया वैरिएंट साउथ अफ्रीका के चमगादड़ों में पाया गया है। नियोकोव चमगादड़ों में बहुत तेजी से फैला है। इसी वजह से इस वायरस से इंसानों को भी खतरा माना जा रहा है। इससे पहले भी 2019 में जब चीन में दुनिया का पहला कोरोना केस सामने आया था, तब भी कई रिपोर्ट्स में इसके चमगादड़ के जरिए ही इंसानों में फैलने की बात कही गई थी।
‘लैब लीक थ्योरी’ के मुताबिक, चीन के वुहान के लैब में चमगादड़ों पर किए जा रहे प्रयोग के दौरान ही कोरोना वायरस लीक होकर इंसानों में फैला। इस थ्योरी के मुताबिक, ये भी संभव है कि चीन ने जानबूझकर कोरोना वायरस में जेनेटिक बदलाव करते हुए इसे इंसानों में फैलाया। हालांकि चीन इस थ्योरी को नकारता रहा है।
क्या इंसानों में भी फैल सकता है नियोकोव?
वुहान यूनिवर्सिटी एंड द चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंस्टीट्यूट ऑफ बायोफिजिक्स के रिसर्चर्स का दावा है कि इस नए कोरोना वायरस के इंसान तक पहुंचने के लिए इसमें बस एक म्यूटेशन की जरूरत है।
bioRxiv वेबसाइट के मुताबिक, नया वायरस नियोकोव और इसका करीबी वायरस PDF-2180-CoV इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है।
क्या वैक्सीन को चकमा दे सकता है ये नया वैरिएंट?
शोधकर्ताओं का दावा है कि नया कोरोना वैरिएंट नियोकोव किसी भी तरह की इम्यूनिटी को चकमा देने में सक्षम है। इससे मौजूदा सभी कोरोना वैक्सीन इस पर बेअसर हो सकती हैं। रिसर्चर्स ने कहा है कि नए वैरिएंट से इंसानों को ज्यादा खतरा इसलिए है क्योंकि यह होस्ट सेल (इंसान) के ACE2 रिसेप्टर्स पर पहले के कोरोना वैरिएंट की तुलना में अलग तरीके से जुड़ता है।
दरअसल, वायरस अपनी स्पाइक प्रोटीन पर पाए जाने वाले रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन (RBD) के जरिए ही इंसान के दिल और फेफड़ों के सेल पर पाए जाने वाले प्रोटीन ACE2 (एंजियोटेंसिन-कनवर्टिंग एंजाइम -2) से चिपककर इंसान के शरीर में प्रवेश करता है और उसे संक्रमित करता है।
इसका नतीजा ये हो सकता है कि व्यक्ति में बनने वाली एंटीबॉडीज या पहले के संक्रमण या वैक्सीनेशन से पैदा हुई इम्यूनिटी कुछ भी नियोकोव के खिलाफ सुरक्षा न दे पाएं।
क्या यह वायरस नया है?
स्पूतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, नियोकोव वायरस नया नहीं है। ये वायरस कुछ साल पहले फैले मर्स-कोव (MERS-CoV) वायरस से संबंधित है।
मर्स-कोव वायरस 2011-15 के दौरान खाड़ी देशों में फैला था। मर्स-कोव वायरस से मर्स नामक बीमारी होती है, जो बेहद जानलेवा मानी जाती है।मर्स-कोव इंसानों में कोरोना वायरस फैलने के लिए जिम्मेदार SARS-CoV-2 से काफी मिलता-जुलता है।
रिसर्चर्स के मुताबिक, कोरोना का नया वैरिएंट माने जा रहे नियोकोव वायरस में काफी हद तक मर्स-कोव (MERS-CoV) वायरस और कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) दोनों से मिलते-जुलते गुण पाए गए हैं
दरअसल, नियोकोव में मर्स-कोव वायरस जैसा ज्यादा मौत के खतरे वाला और कोरोना वायरस की तेजी से फैलने वाला गुण भी है।
मर्स-कोव वायरस से होने वाली बीमारी से हर 3 में से 1 व्यक्ति की मौत हो रही थी। इसी वजह से नियोकोव को भी बेहद खतरनाक माना जा रहा है।
ये मर्स कौन सी बीमारी है?
नए कोरोना वायरस नियोकोव में 2012-15 के दौरान फैली मर्स नामक बीमारी जैसे गुण पाए गए हैं।
अमेरिकी हेल्थ एजेंसी CDC के मुताबिक, मर्स यानी मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) एक ऐसी बीमारी है जो MERS-CoV नाम के वायरस से होती है।
MERS-CoV वायरस का पूरा नाम मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस है।
मर्स बीमारी का लक्षण बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ है। ये बीमारी बहुत ही घातक मानी जाती है और इस बीमारी के 10 मरीजों में से औसतन 3-4 मरीजों की मौत हो जाती है।
WHO के मुताबिक, मर्स का पहला केस 2012 में सऊदी अरब में पाया गया था। वहां से ये बीमारी यूएई समेत खाड़ी के कई अन्य देशों में फैली थी।
इसके सबसे हालिया केस 2015 में साउथ कोरिया में सामने आए थे। WHO के मुताबिक, मर्स बीमारी से पीड़ित करीब 35% लोगों की मौत हो जाती है।
हालांकि कोरोना की तरह मर्स का वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में उतनी तेजी से नहीं फैलता, जब तक कोई इसके मरीज के करीबी संपर्क में न आए।
नियोकोव को लेकर WHO ने क्या कहा?
अब तक किसी इंसान के नियोकोव वायरस से संक्रमित होने की खबर नहीं है। वहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन WHO ने नियोकोव को लेकर कहा है कि उसे इस घटना की जानकारी है, लेकिन रिसर्च में पाए गए वायरस को लेकर और स्टडी किए जाने जरूरत है ताकि ये पता चल सके क्या इससे इंसानों को खतरा होगा।
दरअसल, WHO ही नए वायरस के म्यूटेशन को पहचानता और उसकी सूचना जारी करता है। फिर उसे वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट (VoI) या ज्यादा खतरा होने के आधार पर वैरिएंट ऑफ कंसर्न कैटेगरी में रखता है। WHO अब तक अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन समेत 5 कोरोना वैरिएंट को वैरिएंट ऑफ कंसर्न (VoC) की कैटेगरी में रखा था।
नियोकोव ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
नियोकोव वायरस फैलने की खबर से दुनिया की टेंशन बढ़ गई है, जो पहले ही कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की मार झेल रही है। ओमिक्रॉन को WHO ने नवंबर 2021 में वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित किया था।
अब तक ओमिक्रॉन के केस दुनिया के सभी महाद्वीपों में मिल चुके हैं। पिछले हफ्ते ओमिक्रॉन की वजह से दुनिया भर में रिकॉर्ड 2.1 करोड़ नए कोरोना केस दर्ज किए हैं। उससे पिछले हफ्ते में 1.8 करोड़ नए केसे मिले थे।
ओमिक्रॉन का नया सब-वैरिएंट कौन सा आया है?
नियोकोव वायरस की खोज से पहले ओमिक्रॉन के नए सब-वैरिएंट BA.2 के भी तेजी से फैलने की खबर सरकारों की टेंशन बढ़ा चुकी है। नए सब-वैरिएंट BA.2 को ‘स्टेल्थ ओमिक्रॉन’ या ‘छिपा हुआ ओमिक्रॉन’ कहा जा रहा है।
दरअसल, ‘स्टेल्थ ओमिक्रॉन’ में 28 यूनीक म्यूटेशन होने की वजह से इसे अब तक ओमिक्रॉन (BA.1) को पकड़ने के लिए S-जीन ड्रॉप आउट टेस्ट पर आधारित RT-PCR टेस्ट से पकड़ पाना मुश्किल है।
‘स्टेल्थ ओमिक्रॉन’ के केस भारत, ब्रिटेन, डेनमार्क, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया समेत 40 देशों में मिल चुके हैं। डेनमार्क में तो अब करीब आधे नए कोरोना केसेज के लिए यही सब-स्ट्रेन जिम्मेदार है।
भारत में भी जीनोम सीक्वेंसिंग की निगरानी करने वाली सरकारी संस्था INSACOG ने हाल ही में कहा था कि देश में ओमिक्रॉन का कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो चुका है और नया सब-स्ट्रेन (BA.2) देश में तेजी से फैल रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता में 80% नए केसेज के लिए ओमिक्रॉन का नया सब-स्ट्रेन (BA.2) ही जिम्मेदार है।
क्या होता है म्यूटेशन और वैरिएंट?
जब किसी सूक्ष्मजीव या वायरस के जेनेटिक स्ट्रक्चर में बदलाव होता है, तो उसे म्यूटेशन कहते हैं। दरअसल, कोई भी वायरस खुद को बचाए रखने के लिए खुद में लगातार बदलाव करता रहता है, ये बदलाव ही म्यूटेशन कहलाता है। जैसे कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में ही 32 से ज्यादा म्यूटेशन हैं।
इसी म्यूटेशन की वजह से आगे चलकर वायरस के नए वैरिएंट बनते हैं। दअसल, नया वैरिएंट जेनेटिक रूप से मूल वायरस से थोड़ा अलग होता है, हालांकि ये इतना अलग नहीं होता है कि इसे एक अलग वायरस की श्रेणी में रख दिया जाए।