रिसर्च / दुनिया के सबसे छोटे पक्षीनुमा डायनासॉर की खोज - 990 लाख साल पहले म्यांमार में पाया जाता था

Jai Rana
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रिसर्च / दुनिया के सबसे छोटे पक्षीनुमा डायनासॉर की खोज – 990 लाख साल पहले म्यांमार में पाया जाता था 

 यह पक्षी आज मौजूद 2 ग्राम से भी हल्के क्यूबाई हम्मिंगबर्ड से थी छोटा हुआ करता था

ओकुलुडेन्टावीस खौंग्रेराए आकार में छोटो होने के बाद भी शिकारी था और परागकणों की जगह कीट पतंगों को खाता था

2 इंच जितना यह जीव म्यांमार में रहा करता था, इसकी मौत पेड़ में सिर अटकने से हुई थी
               म्यांमार में दुनिया के सबसे छोटे डायनासॉर का अवशेष मिला है। यह एक एम्बर (पारदर्शी पत्थर) में सुरक्षित मिला है। इसकी मौत पेड़ के छिद्र में सिर अटकने से हुई थी। इसके बाद पेड़ की गौंद ने इसके सिर को कवर कर लिया। इससे सिर का हिस्सा सुरक्षित बच गया। यह करीब 990 लाख साल पुराना बताया जा रहा है। शोधकर्ताओं  ने इसका नाम ओकुलुडेन्टावीस खौंग्रेराए (Oculudentavis khaungraae) रखा है। ये पक्षी वर्तमान में मौजूद 2 ग्राम से भी कम वजनी क्यूबाई हम्मिंगबर्ड से भी छोटा था। यह परागकणों को खाना छोड़ कर कीट-पतंगों को अपना शिकार बनाता था।
             इसकी पहचान करने वाले शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसे देखने पर लगता है, जैसे इसकी मौत कल ही हुई हो। एक चौथाई इंच वाले अवशेष का आकार ब्लूबेरी (एक फल) से भी छोटा है।    इस आधार पर शोधकर्ताओं ने डायनासॉर का कम्प्यूटर से पूरा ढांचा बनाया है। अवशेष में मौजूद जबड़े में 100 के करीब दांत हैं। यह आरी के आकार में हैं। इन्हें 3D तकनीक से देखा जा सकता है।
              चाइनीज एकेडमी ऑफ साइसेंस की जीवाश्म वैज्ञानिक और रिसर्च पेपर की मुख्य लेखिका जिंग्मा ओ’कोन्नोर ने बताया, ‘‘यह देखने में लगता है, जैसे यह अभी-अभी उड़ा हो। मैंने इसे सभी को दिखाया। यह सच में बहुत अच्छा है। मैंने इससे पहले कभी ऐसा जीवाश्म नहीं देखा था। एम्बर में ओकुलुडेन्टावीस की आंख भी दिख रही है, जो एक रेंगने वाली जीव से भी छोटी है। यह खुली हुई है। इसकी अपने समान आकार के वर्तमान में मौजूद पक्षियों से अलग जीवन शैली थी। इसके जबड़े में दांत हैं जबकि, आज के पक्षियों में दांत नहीं हैं।
             लॉस एंजिल्स काउंटी के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के सह पेपर लेखक लार्स शमित्ज ने कहा, ‘‘कशेरुकी (Vertebrates) जंतुओं के अंबर संरक्षण ने हमें डायनासॉर के आखिरी पड़ाव की जानकारी दी है। यह एक दुर्लभ शारीरिक रचना है और दुनिया के सबसे छोटे पक्षी के नजरिए से प्राचीन भी है।’’ यह शोध नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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