
क्या आप जानते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने AMR (Antimicrobial Resistance) को मानव समुदाय के लिए टॉप 10 खतरों की लिस्ट में शामिल किया है। अनुमान तो यहां तक लगाया जा रहा है कि 2050 तक पूरी दुनिया में antibiotic-resistant infections की संख्या एक करोड़ प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है, जिससे पूरी दुनिया में इस समस्या पर लगभग 10000 करोड़ डॉलर खर्च करने पड़ेंगे। पूरी दुनिया में antibiotic के अंधाधुंध प्रयोग से अब बैक्टीरिया भी antibiotic के प्रति सहनशील हो गये हैं जिसके कारण इन पर दवाओं का असर अब नहीं होता। इसी कारण अब दुनिया भर में नये टाइप के एण्टीबायोटिक्स की खोज करने के प्रयास शुरू हो चुके हैं।
अब जो नई खोज हो रही हैं उनमें मिलने वाले एंटीबायोटिक को DAIA (Ddual-acting immuno-antibiotics) कहा जा रहा है। डॉक्टर फारुख डोटीवाला जो इसी फील्ड में काम करते हैं, वह बताते हैं कि हम ऐसे एंटीबायोटिक बनाने पर काम कर रहे हैं जो एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया को भी खत्म कर सके।
अब तक जो एंटीबायोटिक बनाए जाते हैं उनका मुख्य काम होता है- बैक्टीरिया के फंक्शंस पर अटैक करना इसके अलावा उनके न्यूक्लिक एसिड और प्रोटीन को भी क्षति पहुंचाना और उनकी संख्या बढ़ने से रोक देना। लेकिन धीरे-धीरे इन बैक्टीरिया ने अपने अंदर drug resistance विकसित कर ली है और उन पर इन एंटीबायोटिक का असर नहीं होता है। अब जो नए एंटीबायोटिक विकसित किए जा रहे हैं, उनमें यह गुण है कि वे बैक्टीरिया पर दोनों तरफ से अटैक करते हैं, इस कारण बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाती है।
DAIA का विकास अभी प्रारंभिक चरण में है और इससे काफी उम्मीदें भी पूरी दुनिया में लगाई जा रही हैं हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि इस प्रकार के एंटीबायोटिक कितने समय बाद इलाज के लिए उपलब्ध हो पाएंगे।