युकोन कनाडा में सोने की खदान में काम करने वाले मजदूरों को एक बर्फ से ढकी हुई जगह की सफाई करते वक्त एक भेड़िये की शावक की 57000 साल पुरानी बर्फ में दबी ममी मिली है। लगातार बर्फ में दबे रहने से इसका शरीर ममी की तरह से संरक्षित हो गया था। इसका मृत शरीर बहुत अच्छी स्थिति में है, इस कारण से इस पर रिसर्च करना आसान होगा।

इस भेड़िये की मादा शावक का नाम झूर (Jhur) रखा गया है। झूर के बारे में जानने को शोधकर्ताओं में काफी उत्साह है। Des Moines University के एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर जूली मिशेन ने इस शोध की अगुवाई की थी।
मिशेन बताती हैं कि यूकोन में इस तरह की ममी मिलना सामान्य बात नहीं है। बर्फ में किसी भी जानवर की ममी बनने के लिए उसका मरने के तुरन्त बाद बर्फ में दबना अत्यावश्क है। लेकिन जिस जगह झूर मिली वहां ऐसी कोई परिस्थिति होने की संभावना होना सिर्फ एक अनुमान है।
अब इस जीवाश्म के मिलने पर शोधकर्ताओं ने सबसे पहले यह जानने की कोशिश की कि आखिर झूर (Jhur) की मौत कैसे हुई। इस बारे में शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसकी मृत्यु अचानक इसकी मांद के ढह जाने के कारण हुई। दरअसल जब किसी जीव को शिकारियों/ भक्षकों द्वारा मारा जाता है तो उसका शरीर क्षत-विक्षत मिलता है लेकिन झूर का पूरा शरीर सुरक्षित था। झूर की मृत्यु कैसे हुई यह जानने के साथ ही टीम उसकी खान-पान सम्बन्धी आदतों के बारे में भी पता लगाने में कामयाब रही। उसकी खान-पान की आदतों के अध्ययन से पता चला कि झूर पानी में मिलने वाले जीवों को अधिक पसन्द करती थी जैसे कि सेल्मन ।
झूर के जीनोम की जांच करने पर यह पाया गया है कि झूर का सम्बन्घ प्राचीन रूस, साइबेरिया और अलास्का में मिलने वाले भेड़ियों से है। इस जीवाश्म के अध्ययन से प्राचीन समय में मिलने वाले भेड़ियों के विषय में काफी जानकारी मिली है लेकिन अभी तक झूर और उसके परिवार के बारे में पता लगाना बाकी है। मिशेन बताती हैं कि हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि हमें सिर्फ झूर का ही अवशेष क्यों मिला है? उसकी मां और बाकी शावकों का क्या हुआ ? यह हो सकता है कि जब यह हादसा हुआ तब मांद में वह अकेली ही थी और बाकी भेड़िये हादसे के वक्त वहां मौजूद नहीं थे।
यह specimen स्थानीय लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हो गया है इसलिये वे इसे Yukon Beringia Interpretive Centre में प्रदर्शित करने की मांग कर रहे हैं। यह जीवाश्म इतना साफ और सुरक्षित है कि यह कई साल तक बिना संरक्षित किये रह सकता है और इसे यूकोन की अलग-अलग जगहों पर ले जाया जा सकता है। रिसर्च टीम का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में बर्फ में जमे और भी जीवाष्म इस क्षेत्र में मिल सकते हैं।
मिशेन कहती हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का एकमात्र फायदा यह है कि हमें बर्फ के पिघलने से उसमें दबे हुए जानवरों के अवशेष काफी मात्रा में मिल रहे हैं। लेकिन यह हमें यह भी याद दिलाता है कि ग्लोबल वार्मिंग कितनी बढ़ चुकी है।