क्या आप जानते हैं वायरल एस्केप (Viral Escape) क्या होता है?
शायद नहीं।
जब हम वायरस जनित बीमारियों जैसे एचआईवी, इनफ्लुएंजा सहित अन्य कई तरह की बीमारियों की बात करते हैं तो हम सबसे पहले यह सवाल उठाते हैं कि इन बीमारियों की वैक्सीन आज तक क्यों नहीं बन पायी है। दरअसल जब इन बीमारियों के लिए कोई टीका बनाया जाता है तो वह एक या दो बार सफल होने के बाद नाकाम हो जाता है । कोई भी वैक्सीन फेल होने का कारण है वायरस द्वारा म्यूटेशन करना। इसके कारण ही वायरस उस वैक्सीन के प्रभाव से बच जाता है। इसी पूरी प्रक्रिया को वायरल एस्केप कहा गया है।
MIT (Massachusetts Institute of Technology) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक शोध किया और पाया कि किस तरह वायरस वायरल एस्केप के जरिए अपने आप को बचा लेता है। एमआईटी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब के प्रोफेसर बोनी बरजर कहते हैं कि वायरल एस्केप एक बड़ी समस्या है। और इसी कारण से पूरी दुनिया में इन्फ्लूएंजा का सर्वमान्य टीका या फिर एचआईवी का टीका अभी तक विकसित नहीं हो पाया है। वैज्ञानिकों ने इन्फ्लूएंजा, एचआईवी और SARS-CoV-2 (जिसको कोविड-19 के नाम से भी जाना जाता है) उसके मॉडल्स पर रिसर्च की और बताया कि किस तरह वायरस अपने जीन मॉडल में बदलाव करता है ताकि वह वैक्सीन के लिए प्रतिरोधक बन सके।
दरअसल वायरल एस्केप में पूरा खेल वायरस में पाए जाने वाले प्रोटीन का होता है जो वायरस अपने प्रोटीन को जितनी जल्दी मॉडिफाई कर लेता है, वह उतनी ही जल्दी वैक्सीन से बच सकता है। क्योंकि जो टीका बनाया जाता है वह कहीं ना कहीं वायरस के जीनोम से संबंध रखता है, उसी के आधार पर बनाया जाता है इसीलिए जब वायरस के ऊपर वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है तो वायरस उस प्रोटीन की पहचान कर लेता है और अपने आपको उसी के अनुसार मॉडिफाई कर लेता है।
इस पूरी रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एचआईवी के 7000, इन्फ्लूएंजा के 45000 और कोरोनावायरस के 4000 सीक्वेंस का परीक्षण किया। रिसर्च में वैज्ञानिकों ने Natural Language Processing (NLP) का प्रयोग किया।
Blocking escape – क्या वायरल एस्केप को रोकना संभव है?
तो इसका जवाब है अब तक तो नहीं लेकिन फिर भी वैज्ञानिक इस बात का प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह वायरल एस्केप को रोका जा सके क्योंकि आप कितने भी वैक्सीन बना लें, जब तक आप वायरल स्केप को नहीं रोक पाएंगे। आपकी कोई भी वैक्सीन इन कारगर नहीं होगी।
स्रोत – Massachusetts Institute of Technology.