कौन हैं ये हज़ारा लोग
हज़ारा (Hazara) मध्य अफ़गानिस्तान में बसने वाला एक मुस्लिम समुदाय है। ये लोग फारसी भाषा बोलते हैं।
मूलत: हज़ारा लोग शिया मुस्लिम होते हैं। फारसी की एक उप भाषा हज़ारगी इनके यहां बोली जाती है।
हज़ारा फारसी, मंगोलियाई और तुर्क वंश का एक अफगान जातीय अल्पसंख्यक समूह है। इन्हें मंगोल शासक चंगेज खान का वंशज भी माना जाता है।
जनसंख्या की दृष्टि से यह समुदाय अफ़गानिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा समुदाय है। इनकी जनसंख्या लगभग 30-40 लाख के बीच में है जो पश्तून और ताजिकों के बाद तीसरी सबसे बड़ी आबादी है।
अफ़गानिस्तान में इनकी आबादी प्रमुख रूप से बामियान और दायकुन्दी राज्य में बसी हुई है। साथ ही पाकिस्तान और ईरान में भी ये लोग शरणार्थी जीवन जी रहे हैं।
पाकिस्तान में इनकी आबादी 15 लाख के करीब बताई जाती है, जिनमें से अधिकांश क्वेटा के आसपास रहते हैं। पाकिस्तान का क्वेटा अफगानिस्तान और ईरान से सटा हुआ है इसलिए हजारा समुदाय के लोग इन इलाकों में ज्यादा रहते हैं।
माना जाता है कि हजारा 16 वीं शताब्दी की शुरुआत में फारस में सफवी राजवंश के समय में शिया धर्म में परिवर्तित हो गए थे। चूंकि, अफगानिस्तान में अधिकांश सुन्नी मुसलमान हैं, इसलिए हजारा समुदाय के ऊपर सदियों से जुर्म और भेदभाव किया जा रहा है।
इनका नाम हज़ारा कैसे पड़ा
अब तक यह तो confirm नहीं हुआ कि हज़ारा का नाम कहाँ से आया है। लेकिन यह समझा जाता है कि मंगोल सेना में हजार सैनिकों का दस्ता तैयार किया जाता था। संभव है कि हजारा समुदाय की उत्पत्ति वहीं से हुई हो
कुछ हज़ारा लोगों के नाम पारम्परिक रूप से मंगोल हस्तियों के नाम पर होते हैं, जैसे कि ‘तुलई ख़ान हज़ारा’ जो चंगेज़ ख़ान के सबसे छोटे बेटे तोलुइ ख़ान के सम्मान में रखा जाता है।
आनुवांशिक (Genetics) रूप से भी इस समुदाय के लोग चंगेज खान से मिलते हैं। हज़ारा लोग अक्सर शक्ल-सूरत से भी मंगोल नस्ल के लगते हैं।
धार्मिक नज़रिए देखा जाए तो तुर्की-मंगोल इलख़ान साम्राज्य चंगेज खान की मृत्यु के बाद में शिया धर्म को अपना चुका था। हज़ारा समुदाय का शिया होना उसके चंगेज खान के वंशज होने की बात को और पुख्ता करता है।
हालांकि कुछ विद्वान मानते हैं कि हज़ारा शुद्ध मंगोल नहीं हैं बल्कि ये मंगोलों और मध्य एशिया की अन्य प्राचीन जातियों का मिश्रण हैं जैसे- तुषारी, कुषाण आदि।
हज़ारा लोगों का निवास स्थान कहां है?
हज़ाराजात हज़ारा लोगों की मध्य अफ़ग़ानिस्तान में स्थित मातृभूमि है। इसे जिसे हज़ारिस्तान भी कहा जाता है।
यह हिन्दू कुश पर्वतों के पश्चिमी भाग में कोह-ए-बाबा श्रृंखला में विस्तृत है। इसके उत्तर में बामयान द्रोणी, दक्षिण में हेलमंद नदी, पश्चिम में फिरूज़कुह पहाड़ और पूर्व में उनई दर्रा तक इसकी सरहदें मानी जाती हैं।
पश्तून क़बीलों द्वारा हज़ाराजात पर हमलों के कारण इसकी सरहदें समय-समय पर बदलती रहीं हैं।बामयान और दायकुंदी प्रांत लगभग पूरे-के-पूरे हज़ाराजात में आते हैं।
इसके अलावा बग़लान, हेलमंद, ग़ज़नी, ग़ोर, ओरूज़्गान, परवान, समंगान, सर-ए-पोल और मैदान वरदक प्रान्तों के बड़े हिस्से भी इसका भाग माने जाते हैं।
कब से हो रहा है हज़ारा समुदाय पर अत्याचार?
वैसे तो यह समुदाय सदीयों से प्रताड़ना झेल रहा है लेकिन जब अफ़गानिस्तान पर तालिबान का शासन आया तब इन लोगों पर पर बहुत जुल्म ढाये गये।
तालिबान के आतंक से त्रस्त होकर इस समुदाय के लोगों ने अफ़गानिस्तान छोड़ दिया और वे पाकिस्तान के क्वेटा में जाकर बस गये। इसके अलावा काफी संख्या में लोग ईरान में भी जाकर बस गये हैं।
तालिबान के बाद जब ISIS का प्रभाव बढ़ा, तब भी इस समुदाय को बहुत ही बेरहमी से प्रताडि़त किया गया।
आज भी पाकिस्तान में शरणार्थी जीवन जी रहे हज़ारा समुदाय के लोगों की हत्या और महिलाओं से सामूहिक दुव्यवहार की खबरें आती रहती हैं।